स्थान: वलीदपुर (भीरा), जनपद मऊ अवसर: पुस्तक विमोचन (इजरा) कार्यक्रम
कल की रात वलीदपुर (भीरा) के लिए केवल एक सामान्य रात नहीं थी, बल्कि यह ज्ञान, इतिहास और अदब के संगम की एक यादगार रात बन गई। मुझे मौलाना महफूज साहब कासमी द्वारा लिखित अत्यंत महत्वपूर्ण ऐतिहासिक दस्तावेज “तारीख भीरा” के विमोचन (इजरा) कार्यक्रम में सम्मिलित होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
इतिहास को सहेजने की एक अनूठी कोशिश
किसी भी क्षेत्र का इतिहास उसकी पहचान होता है, और जब वह इतिहास एक किताब की शक्ल लेता है, तो आने वाली नस्लें अपनी जड़ों से रूबरू हो पाती हैं। मौलाना महफूज साहब कासमी ने “तारीख भीरा” के माध्यम से इस क्षेत्र की विरासतों, महान व्यक्तित्वों और सामाजिक ताने-बाने को जिस खूबसूरती से पिरोया है, वह काबिले-तारीफ है।
कार्यक्रम की कुछ झलकियां:

- अदबी माहौल: कार्यक्रम में देर रात तक विद्वानों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और क्षेत्रीय गणमान्य लोगों की उपस्थिति ने यह साबित कर दिया कि आज भी हमारे समाज में किताबों और ज्ञान की कितनी अहमियत है।
- भावुक क्षण: पुस्तक के विमोचन के दौरान मौलाना साहब के संघर्षों और इस किताब को लिखने के पीछे की उनकी लगन की चर्चा की गई।
- सांस्कृतिक विरासत: वलीदपुर (भीरा) का इतिहास गौरवशाली रहा है, और अब यह इतिहास इस किताब के रूप में हमेशा के लिए सुरक्षित हो गया है।
मेरी व्यक्तिगत राय
एक प्रतिनिधि और समाज का हिस्सा होने के नाते, मेरा मानना है कि ऐसी पुस्तकें समाज का आईना होती हैं। “तारीख भीरा” केवल एक किताब नहीं, बल्कि भीरा की मिट्टी की खुशबू और यहाँ के पूर्वजों की कहानियों का संग्रह है। मैं मौलाना महफूज साहब कासमी को इस महान कार्य के लिए तहे दिल से मुबारकबाद देता हूँ।
“किताबें वह जरिया हैं जो हमें अतीत से जोड़ती हैं और भविष्य के लिए एक बेहतर रास्ता दिखाती हैं।”
