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सफलता की कहानी: मऊ जिले की सीबीएसई टॉपर आस्था चौहान से खास बातचीत

अक्सर कहा जाता है कि सफलता रातों-रात नहीं मिलती, इसके पीछे सालों की मेहनत और सही दिशा होती है। आज के हमारे ब्लॉग में हम बात कर रहे हैं मऊ जिले की सीबीएसई बोर्ड टॉपर आस्था चौहान की, जिन्होंने अपनी मेहनत से न केवल अपने परिवार का, बल्कि पूरे जिले का नाम रोशन किया है।

AAP KI BAAT पॉडकास्ट में अरशद जमाल के साथ हुई इस बातचीत में आस्था ने अपनी इस शानदार यात्रा के कई दिलचस्प पहलुओं को साझा किया।

1. शुरुआती शिक्षा और प्रेरणा

आस्था ने अपनी शिक्षा की शुरुआत डॉनवास्को स्कूल से की और कक्षा 2 से वे चंद्रा पब्लिक स्कूल की छात्रा रही हैं। आस्था अपनी सफलता का सबसे बड़ा श्रेय अपने माता-पिता के प्रोत्साहन और विश्वास को देती हैं। उनकी माँ, जो स्वयं एक शिक्षिका रह चुकी हैं, ने उन्हें हमेशा मोटिवेट किया और घर पर ही पढ़ाई में मदद की, जिसके कारण उन्हें कभी बाहरी ट्यूशन की ज़रूरत नहीं पड़ी। 02:11 Opens in a new window

2. पढ़ाई का तरीका: सेल्फ स्टडी और निरंतरता

आस्था का मानना है कि बोर्ड परीक्षा कोई हौवा नहीं है। अगर छात्र शुरुआत से ही निरंतरता (Consistency) बनाए रखें, तो इसे आसानी से क्रैक किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि वे स्कूल के बाद घर पर खुद से पढ़ाई (Self-study) करना पसंद करती थीं। 04:47 Opens in a new window

  • शेड्यूल: उनका कोई फिक्स ‘हार्ड एंड फास्ट’ नियम नहीं था। वे रात में देर तक पढ़ना पसंद करती थीं, क्योंकि उस समय वे बेहतर फोकस कर पाती थीं। 06:18 Opens in a new window
  • मैसेज: आस्था का कहना है कि हर बच्चे को अपनी क्षमता के अनुसार अपना पढ़ाई का समय (सुबह या रात) खुद तय करना चाहिए। 06:48 Opens in a new window

3. भविष्य के सपने: समाज सेवा का लक्ष्य

आस्था का लक्ष्य एक MBBS डॉक्टर बनना है और उन्होंने इसके लिए अभी से NEET की तैयारी शुरू कर दी है। वे समाज के उन गरीब और जरूरतमंद लोगों की मदद करना चाहती हैं जो महंगे इलाज का खर्च नहीं उठा सकते। वे इस धारणा को बदलना चाहती हैं कि डॉक्टर गरीबों की मदद नहीं करते। 03:21 Opens in a new window

4. एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटीज का महत्व

आस्था केवल पढ़ाई में ही नहीं, बल्कि पेंटिंग, आर्ट एंड क्राफ्ट और भाषण (Speech) में भी गहरी रुचि रखती हैं। उनका मानना है कि पढ़ाई के साथ-साथ इन गतिविधियों में शामिल होने से दिमाग फ्रेश रहता है और आप केवल “किताबी कीड़ा” बनकर नहीं रह जाते। 11:14 Opens in a new window

5. बोर्ड परीक्षा के डर को कैसे दूर करें?

बोर्ड परीक्षा के दबाव पर बात करते हुए आस्था ने एक बहुत ही गहरी बात कही:

“अगर हम प्रेशर को पॉजिटिवली लें, तो यह हमें मोटिवेट करता है और बेहतर परिणाम देता है। लेकिन अगर इसे नेगेटिव तरीके से लिया जाए, तो यह सेहत और रिजल्ट दोनों पर बुरा असर डालता है।”13:20 Opens in a new window


निष्कर्ष: आस्था चौहान की यह कहानी उन सभी छात्रों के लिए प्रेरणा है जो बड़े सपने देखते हैं। साधारण परिवार से आने के बावजूद, स्पष्ट लक्ष्य और मेहनत के दम पर उन्होंने साबित कर दिया कि कुछ भी असंभव नहीं है।

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