हाल ही में वाराणसी में आयोजित गोष्ठी “उर्दू ज़ुबानों अदब का मुसतकबिल” (उर्दू भाषा और साहित्य का भविष्य) में नगर पालिका परिषद, मऊ के चेयरमैन अरशद जमाल ने विशेष रूप से शिरकत की। इस दौरान उन्होंने उर्दू साहित्य के भविष्य और पूर्वांचल में शिक्षा के विस्तार पर अपने प्रेरणादायक विचार रखे।
पूर्वांचल में नए कैंपस की आवश्यकता
गोष्ठी को संबोधित करते हुए अरशद जमाल ने इस बात पर ज़ोर दिया कि आज भी मऊ और आसपास के क्षेत्रों के बड़ी संख्या में छात्र उच्च शिक्षा के लिए हैदराबाद जैसे दूरस्थ शहरों का रुख करने को मजबूर हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि:
- पूर्वांचल में छात्रों की बढ़ती संख्या को देखते हुए यहाँ मौलाना आज़ाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी के एक नए कैंपस की तत्काल आवश्यकता है।
- यह कैंपस केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और शैक्षिक समागम का माध्यम बनेगा।
कला और संस्कृति का संरक्षण
चेयरमैन अरशद जमाल ने (ख़ताती/कैलिग्राफी) विभाग की स्थापना पर बल दिया। उनका मानना है कि पारंपरिक कलाओं और आधुनिक शिक्षा का मिलन ही हमारी युवा पीढ़ी को जड़ों से जोड़कर रखेगा।

उर्दू साहित्य और मऊ की भूमिका
अरशद जमाल ने कहा कि किसी भी भाषा का भविष्य तभी सुरक्षित है जब उसे शिक्षा, रोजगार और संस्कृति के साथ जोड़कर देखा जाए। मऊ की पहचान को शिक्षा के क्षेत्र में और अधिक प्रखर बनाना तथा उर्दू साहित्य को नई पीढ़ी तक पहुँचाना ही हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।





“उर्दू अदब का भविष्य शिक्षा और संस्कृति के समन्वय में निहित है। मऊ के छात्रों के सुनहरे भविष्य और उर्दू कला के संरक्षण हेतु पूर्वांचल में शैक्षिक संसाधनों का विस्तार हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए।” — अरशद जमाल, चेयरमैन (नगर पालिका परिषद, मऊ)
